देवप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवप्रयाग के पास मंगलवार सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने राजस्थान के जैसलमेर के दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। चारधाम यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं की कार अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी में समा गई, जिससे कई लोगों की जान चली गई और परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड नंबर की यह कार 27 मई को आठ श्रद्धालुओं को लेकर चारधाम यात्रा पर निकली थी। उत्तराखंड सरकार और प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा के लिए न्यूनतम 10 दिन का यात्रा शेड्यूल निर्धारित किया गया है, ताकि पर्वतीय मार्गों पर वाहन चालकों को पर्याप्त आराम मिल सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।

घर लौटने की जल्दी थी, लेकिन घर ही नहीं लौट पाए

लेकिन बताया जा रहा है कि श्रद्धालु निर्धारित समय से पहले ही यात्रा पूरी कर लौट रहे थे। दस दिन में पूरी होने वाली यात्रा को मात्र सात दिन में समाप्त करने की जल्दबाजी ने हादसे को जन्म दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चालक लगातार लंबी दूरी तय कर रहा था, जिससे थकान और एकाग्रता में कमी की संभावना जताई जा रही है।

देवप्रयाग के पास वाहन अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई से अलकनंदा नदी में जा गिरा। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि चारधाम यात्रा आस्था का विषय है, प्रतिस्पर्धा का नहीं। पर्वतीय मार्गों पर जल्दबाजी और थकान कभी-कभी जिंदगी भर का दुख दे जाती है।

संदेश:

“यात्रा में जल्दबाजी नहीं, सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। चारधाम यात्रा का आनंद लें, लेकिन निर्धारित यात्रा कार्यक्रम और सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करें।”

By uk vani

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