राजधानी देहरादून में बीते करीब 160 दिनों से धरने पर बैठे नर्सिंग अभ्यर्थियों का लंबा संघर्ष अब असर दिखाने लगा है। परेड ग्राउंड में लगातार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन ने तब और तूल पकड़ लिया, जब कुछ अभ्यर्थी पिछले तीन दिनों से पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध जता रहे हैं। करीब 60 घंटे तक टंकी पर डटे रहने के बाद सरकार हरकत में आई है और मांगों पर विचार शुरू कर दिया गया है।

नर्सिंग अभ्यर्थी लंबे समय से वर्षवार भर्ती (Year-wise Recruitment) लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित अंतराल पर भर्ती न होने के कारण हजारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर स्वास्थ्य मंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभ्यर्थियों का ज्ञापन सरकार को प्राप्त हो चुका है और उनकी मांगों का गंभीरता से परीक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों के मॉडल को भी देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में लागू शासनादेश का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि उसी आधार पर उत्तराखंड में भी बेहतर व्यवस्था लागू की जा सके। अध्ययन पूरा होने के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि लंबे समय से सिर्फ आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया..
अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेती है और क्या नर्सिंग अभ्यर्थियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो पाती है या नहीं।
